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लूला की चौथी जीत से भारत को क्या मिलेगा? PM मोदी ने दी बधाई, खनिजों से व्यापार तक बड़े फायदे की उम्मीद

ब्राजील में लूला की चौथी जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई! अब भारत-ब्राजील के बीच 30 अरब डॉलर के व्यापार और दुर्लभ खनिजों पर सहयोग बढ़ने की उम्मीद।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Brazil Presidential Election: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चुनाव में जीत दर्ज कर एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उन्हें बधाई देते हुए भारत और ब्राजील के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। लूला की जीत ऐसे समय हुई है, जब दोनों देश व्यापार, डिजिटल तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि उनकी वापसी से भारत को क्या लाभ मिल सकता है?

दूसरे चरण में लूला ने कैसे पलटी बाजी?

ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के अनुसार, दूसरे चरण की मतगणना में लूला को 51.8 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2 प्रतिशत मत हासिल हुए। दोनों के बीच करीब 44 लाख वोटों का अंतर रहा। चार अक्टूबर को हुए पहले चरण में लूला पीछे रह गए थे। फ्लावियो को 47.03 प्रतिशत और लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बावजूद दूसरे चरण में लूला ने बढ़त हासिल कर ली। फ्लावियो, पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे हैं।

लूला की जीत के बाद ब्राजील की राजनीति के साथ-साथ उसकी विदेश नीति और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंधों पर भी नजरें टिकी हैं।

PM मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लूला को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वह भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और उसका विस्तार करने के लिए उनके साथ काम करने को उत्सुक हैं। मोदी ने यह भी कहा कि दोनों देश ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और अधिक समावेशी, समानतापूर्ण तथा टिकाऊ दुनिया के निर्माण में सहयोग जारी रखेंगे।

भारत के लिए क्यों अहम है लूला की वापसी?

भारत और ब्राजील दोनों ब्रिक्स के सदस्य हैं। भारत ने 2026 में इस समूह की अध्यक्षता संभाली है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्व और बढ़ गया है। लूला फरवरी 2026 में भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे और एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत में आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर दिया गया था।

दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल तकनीक, इस्पात क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला, स्वास्थ्य नियमन, छोटे कारोबार और डाक सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए थे।

30 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

भारत और ब्राजील के बीच व्यापार लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 15.07 अरब डॉलर रहा। दोनों देश 2030 तक व्यापार को बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य सामने रख चुके हैं। लूला की वापसी से इस दिशा में पहले से चल रही बातचीत और समझौतों को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

दुर्लभ खनिजों पर क्यों टिकी हैं निगाहें?

ब्राजील के पास दुर्लभ मृदा तत्वों के बड़े भंडार हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक तकनीकों में होता है। भारत भी महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए नए साझेदार तलाश रहा है, ताकि सीमित स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सके। ब्राजील के साथ सहयोग बढ़ने से भारत को खनिज आपूर्ति शृंखला मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए निवेश, उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े समझौतों को व्यावहारिक रूप देना जरूरी होगा।

लूला के सामने भी कम नहीं हैं चुनौतियां

चौथे कार्यकाल में लूला को घरेलू स्तर पर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। संसद में दक्षिणपंथी दलों की मजबूत मौजूदगी, महंगाई, सार्वजनिक कर्ज और आर्थिक दबाव उनकी सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव भी ब्राजील की नीतियों को प्रभावित कर सकता है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लूला की वापसी भारत-ब्राजील रिश्तों को नए मुकाम तक पहुंचाएगी? इसका जवाब आने वाले वर्षों में व्यापार, खनिज सहयोग और दोनों देशों के बीच होने वाले समझौतों की प्रगति से मिलेगा।

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